बचपन से ही मेरा झुकाव उद्यमिता की ओर था। मैं लगातार नए विचारों की खोज करता रहता था और बाद में एक सॉफ्टवेयर वेंचर का सह-संस्थापक भी बना। 2015 तक आते-आते मैं एक नई दिशा में सोचने लगा और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से बाहर के अवसरों को तलाशना चाहता था। उसी दौरान, मैं और मेरी पत्नी हिमालय के दार्जिलिंग गए, उसी यात्रा के दौरान एक साधारण-सी बात ने एक नए और अनोखे व्यावसायिक विचार को जन्म दिया।
मैंने पहली बार एक स्थानीय फार्म पर कुत्तों को छुरपी (याक और गाय के दूध से बना पारंपरिक च्यू) चबाते हुए देखा। जिस तरह वे स्वाभाविक रूप से इसकी ओर आकर्षित हो रहे थे, उसने मुझे इसके एक हेल्दी और लंबे समय तक चलने वाले च्यू के रूप में संभावनाओं के बारे में सोचने पर प्रेरित किया। चूंकि मैं और मेरी पत्नी दोनों ही हिमालयी क्षेत्रों से हैं, इसलिए हमारे लिए इस हिमालयी परंपरा और कहानी को दुनिया तक पहुंचाना एक स्वाभाविक कदम था। इसी सोच के साथ हमने खनाल फूड्स की स्थापना की, जिसके तहत बाद में दो ब्रांड डॉगसी (पेट्स के लिए) और हिमालयन नेटिव्स (इंसानों के लिए) लॉन्च किए गए। हमारा मूल वादा, यानी प्राकृतिक और शुद्ध उत्पाद देने का, शुरुआत से लेकर आज तक अटूट बना हुआ है।
उस समय भारत में शाकाहारी और मानव-ग्रेड पेट ट्रीट्स अभी भी एक सीमित श्रेणी थी। भले ही हमें पेट इंडस्ट्री का अनुभव नहीं था, लेकिन हमारे कॉर्पोरेट अनुभव ने हमें मजबूत आधार दिया। मैंने ऑपरेशंस और बिज़नेस प्लानिंग पर ध्यान दिया, जबकि मेरी पत्नी ने मार्केटिंग और ब्रांड डेवलपमेंट संभाला।
हमने छोटे स्तर से शुरुआत की और दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल से 20 किलो छुरपी खरीदी। जैसे-जैसे हमने प्रोडक्ट को टेस्ट किया और उसकी स्वीकार्यता को समझा, मैंने वैश्विक पेट मार्केट पर रिसर्च शुरू की। पता चला कि यह उद्योग ₹9.96 लाख करोड़ से अधिक का है, और केवल अमेरिका में डेंटल च्यू सेगमेंट ₹41,500 करोड़ का है। इस क्षेत्र में केमिकल वाले रॉहाइड ट्रीट्स का प्रभुत्व था, और हमें विश्वास था कि डॉगसी एक हेल्दी और प्राकृतिक विकल्प बन सकता है।
जैसे-जैसे हमारा निर्यात यूके, जापान, चीन, फ्रांस और कनाडा जैसे देशों में बढ़ा, हमें महसूस हुआ कि भारत में हमारी डिजिटल उपस्थिति अभी मजबूत नहीं है। हमें अपनी ऑनलाइन रणनीति, ब्रांडिंग और ग्राहक पहुंच को बेहतर बनाने की जरूरत थी।
इसी उद्देश्य से हमने 2025 में वॉलमार्ट वृद्धि प्रोग्राम जॉइन किया । इस प्रोग्राम ने हमें एक व्यवस्थित डिजिटल ग्रोथ रणनीति बनाने में मदद की । प्रैक्टिकल सीख, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और फिल्पकार्ट पर ऑनबोर्डिंग एवं ऑप्टिमाइजेशन के जरिए हमें अपने ऑनलाइन बिज़नेस को बढ़ाने का सही रास्ता मिला।
बेहतर कैटलॉग, प्रोडक्ट लिस्टिंग और स्टोरफ्रंट ऑप्टिमाइजेशन के जरिए हमने फ्लिपकार्ट पर अपनी दृश्यता और ग्राहक जुड़ाव बढ़ाया। इससे भारत में हमारे व्यवसाय को मजबूती मिली और फ्लिपकार्ट के जरिए घरेलू रेवेन्यू में 51% की वृद्धि हुई।
इस प्रोग्राम ने हमें वॉलमार्ट.कॉम पर आने में भी मदद की, जिससे हमारी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति और मजबूत हुई। वॉलमार्ट मार्केटप्लेस के जरिए हमें अमेरिका में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिला। पिछले एक साल में हमारा वैश्विक ऑनलाइन व्यवसाय लगभग 300% बढ़ा है। हमारी ऑनलाइन आय लगभग ₹80 लाख से बढ़कर ₹4.2 करोड़ हो गई है। मार्च 2026 तक, हम अमेरिका में वॉलमार्ट मार्केटप्लेस के जरिए हर महीने लगभग ₹20 लाख की बिक्री कर रहे हैं।
वॉलमार्ट वृद्धि प्रोग्राम ने हमें अपने वैल्यू प्रपोजिशन को बेहतर तरीके से समझने और प्रस्तुत करने में मदद की। इसके मार्गदर्शन से हमने गुणवत्ता, टिकाऊ उत्पादन और नवाचार पर अधिक ध्यान दिया। आज हम एक ज़ीरो-वेस्ट, सोलर-पावर्ड और कार्बन-नेगेटिव कंपनी के रूप में काम कर रहे हैं। हमारे पास बीएसआई सर्टिफिकेशन और एफएससी प्रमाणित सामग्री है, और हम हिमालयी किसानों से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से सोर्सिंग करते हैं।
आज हम 30 से अधिक देशों में निर्यात करते हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार हमारे कुल रेवेन्यू का 95% योगदान देता है। हमारी यात्रा यह दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, मजबूत संचालन और स्पष्ट मूल्य प्रस्ताव के साथ एक क्षेत्रीय उत्पाद को वैश्विक स्तर तक पहुँचाया जा सकता है।